ऐतिहासिक रूप से, भारतीय देवीयां बहुत शक्तिशालीऔर बेहद खूबसूरत थीं। इन सुंदर देवियों में दिव्य शक्तियाँ थीं और वे बहुत आसानी से दुष्ट असुरों को मार देती थीं या उन्हें हरा देती थीं। लेकिन कलयुग की शुरुआत के साथ, दुष्ट अघोरियों की शक्ति कई गुना बढ़ गई है और नकारात्मक बुरी शक्तियों में वृद्धि के कारण, सुंदर देवियों की दिव्य शक्तियों में काफी कमी आई है। अघोरियों ने देवियों के कई काले रहस्य समझ लिए हैं और उन्होंने इन सुंदर देवियों के खिलाफ अपनी काली शक्तियों का उपयोग करना शुरू कर दिया है। वास्तव में वर्ष 2020 तक, कई देवियों को या तो बेरहमी से तड़पा तड़पा के मार दिया गया है या अघोरियों ने उन देवियों को अपने यौन सुख के लिए अपनी दासी बना लिया गया है।
मातारानी नामक देवी सबसे सुंदर और बहुत शक्तिशाली थी और दुष्ट अघोरियां अब तक उसे पकड़ने या हावी होने में विफल रही हैं। मातारानी अत्यंत सुंदर और सुडोल शरीर की थी। उनका दिव्य सुंदर चेहरा, लंबी गर्दन, लंबे बाल काले बाल थे, सिर पर एक सुनहरा मुकुट उनकी सुंदरता को और बढ़ाता था। उसके स्तन काफी कामुख, दूधिया और बड़े थे, वो अपनी छाती को एक लाल रंग के ब्लाउज से ढकती थीं, उनकी छाती के नीचे का हिस्सा काफी सुडोल था और उनकी नाभि बहुत उत्तेजक दिखती थी, लाल ब्लाउज के नीचे कवर किया गया था जिसने उसके दरार को काफी हद तक उजागर किया था। देवी के सुडौल और उत्तेजक कूल्हे, शक्तिशाली और दूधिया जांघें और लंबी टांगें लाल साड़ी में ढंके रहते थे। वह अपने शरीर के पर बहुत सारे सुनहरे गहने पहनती थी, जो देवी की खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ते हैं। देवी मातारानी के दाहिने हाथ में हमेशा एक त्रिशूल था और यह त्रिशूल वास्तव में कलयुग में उनकी प्रमुख शक्तियों का स्रोत था। इस त्रिशूल के बिना देवी अपनी अधिकांश शक्तियां खो देती हैं और जब यह त्रिशूल उनके पास नही हो तो ऐसे में, दुष्ट अघोरि द्वारा उन्हें हराया का सकता है।
देवी मातारानी एक गांव रुद्रपुर में अपने मंदिर में एक महिला पुजारन के भेस में रहती थीं। अपने बदले हुए भेस में वह बिना किसी आभूषण के एक सादे नारंगी साड़ी पहनती थी। इस सादे रूप में भी वह बहुत सुंदर और आकर्षक दिखती थी, क्योंकि देवी का फिगर बहुत सेक्सी था और उनके सुडौल शरीर को दर्शाता था।
देवी मातारानी की एक भक्त थी जिनका नाम सरिता था, सरिता दिन-रात मातारानी की पूजा करती थी। मातारानी अपने सभी भक्तों का ध्यान रखती थी, विशेष रूप से सरिता का ध्यान रखती थी जिसे देवी अपनी पुत्री मानती थी। सरिता देवी का आशीर्वाद लेने के लिए हर रोज उनके मंदिर में आती थीं। कई बार सरिता के पति राव भी सरिता के साथ मंदिर आते थे। राव पुजारन की सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गए थे और उनकी सुंदरता राव के शारीर में यौन उत्तेजना पैदा करती थी।
पुजारन के रुप में मातारानी के पास उनका त्रिशूल नही होता था, जिसकी वजह से उनकी शक्तियां उनके पास नहीं होती थी। पुजारण के सुन्दर रूप से मंत्रमुग्ध होकर राव हर रोज मंदिर आने लगा और पुजारन से किसी न किसी बहाने से बात करने लगा। देवी के पास पुजारन के रूप में काफी कम शक्तियां रहती थीं इस वजह से वो जान नही पाई की राव की असली मंशा क्या है और वो सुन्दर देवी राव पे भरोसा करने लगी। राव कुछ भी करके पुजारन के सुंदर सुडौल शरीर को अपने वश में करना चाहता था। राव को नहीं पता था कि यह पूजा रन असल में एक शक्तिशाली देवी है। एक दिन राव एक अघोरी जिसका नाम भैरव था के पास गया और उसने उस अघोरी को बताया कि वह पूजारन को अपने वश में करना चाहता है। अघोरी तुरंत उसके साथ मंदिर की ओर चल पड़ा और मंदिर जाकर जब राव ने पूजारन की तरफ इशारा किया तब अघोरी भैरव हक्का बक्का रह गया।
अघोरी भैरव बहुत ज्यादा शक्तिशाली था और पूजा रन को देखते ही वह समझ गया की यह सुंदर स्त्री असल में देवी माता रानी है। उस सुंदर देवी को देखकर भैरव का जननांग मोटा और लंबा हो गया और वह देवी को पाने के बारे में सोचने लगा। अघोरी अपनी दिव्य आंखों से देख सकता था कि यह देवी अत्यंत शक्तिशाली है और इसे इतनी आसानी से नहीं हराया जा सकता। अघोरी वापस अपने डेरे पर चला गया और उसने राव को भी वहां बुलाया। अघोरी निरहू को सारी सच्चाई बता दी और उसे बता दिया कि यह सुंदर पूजारन कोई और नहीं खुद देवी मातारानी है।
अघोरी में राव को बताया कि हर शक्तिशाली देवी की कुछ ना कुछ कमजोरी होती है और वह इस सुंदर देवी को अपने वश में करने के लिए उसकी कमजोरी ढूंढ निकालेगा। अघोरी मंत्र साधना में विलीन हो जाता है और देवी की कमजोरी समझने के लिए अपने पाप के देवता का आह्वान करता है।पाप का देवता अघोरी को बताता है की देवी की सारी शक्तियां उसके त्रिशूल में हैं और यदि किसी प्रकार उस देवी के त्रिशूल को अपने कब्जे में ले लिया जाए तो वह देवी शक्तिहीन हो जाएगी। पाप का देवता उसे बताता है की देवी से उसका त्रिशूल अलग करना आसान काम नहीं है और यदि देवी को उनकी मंशा पता चली तो वह अघोरी और राव का अंत कर देगी। आगे पाप का देवता एक सुझाव देता है, वह बोलता है की राव की पत्नी यानी सरिता पर मातारानी का अटूट विश्वास है और सरिता का फायदा उठाकर देवी को फसाया जा सकता है।
पाप का देवता अघोरी को बताता है कि पूजारन के रूप में देवी के पास अपनी दैविक शक्तियों नहीं होती क्योंकि उसके हाथ में उसका त्रिशूल नहीं होता। पाप का देवता बताता है कि पौराणिक काल में असुरों की सारी शक्तियां एक काले पत्थर में कैद हो गई थी और आज के समय में यह काला पत्थर देवी मातारानी की शक्तियों से कहीं अधिक शक्तिशाली है। यदि माता रानी के सामने के सामने यह काला पत्थर रख दिया जाए तो पाप के देवता यकीन दिलाता है की वह देवी अपनी सारी शक्तियां खो देगी औरत दर्द में तड़पने लगेगी। पाप का देवता अघोरी भैरव को उस काले पत्थर को लाने का मार्ग बता देता है और साथ में यह चेतावनी भी देता है की भैरव मंदिर में जाकर उस देवी का सामना ना करें क्योंकि वहां उसके भक्त उस देवी की रक्षा करेंगे। पाप का देवता बताता है की सुंदर देवी को मंदिर से कहीं दूर लाने के लिए सरिता का इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि देवी सरिता पर विश्वास करती है।
इसके बाद भैरव ध्यान मुद्रा से उठकर राव को बताता है उसे उस सुंदर पूजारण को मंदिर से कहीं दूर एकांत में लेकर आना होगा। यदि राव उस देवी को कहीं दूर एकांत में दे आया तो घोड़े विश्वास दिलाता है कि वह उस देवी की सारी शक्तियां छीन लेगा और उस सुंदर देवी को राव की दासी बना देगा। इसके तुरंत बाद भैरव वह काला पत्थर लेने चला जाता है और राम अपने घर चला जाता है। घर जाकर राव अपनी पत्नी सरिता को बताता है कि उन्होंने एक नई जमीन खरीदी है और वह चाहता है की सरिता मंदिर की पूजारन को उस ज़मीन का मुहूर्त करने के लिए आमंत्रित करें।
सरिता मंदिर जाती है और सुंदर पूजारन के पास जाकर बैठ जाती है वह बोलती है " पूजा रणजी मेरे पति ने गांव से कुछ दूर एक जमीन खरीदी है और हम चाहते हैं कि आप कृपया उसकी मुहूर्त की पूजा करवाएं। मैं और मेरे पति राव आपके बहुत आभारी रहेंगे, कृपया मना मत करना। " पूजारन मुस्कुराते हुए कहती है " पुत्री सरिता मैंने अपना जीवन माता रानी की सेवा में दे दिया है और मैं इस मंदिर से बाहर नहीं जाती तुम भी कृपया मंदिर से बाहर बुलाकर मुझे शर्मिंदा ना करो।" असल में देवी मंदिर से बाहर जाने में हिचकिचाती थी क्योंकि उसे पता था कि बाहर बहुत सारे पापी अघोरी उसकी शक्तियां छीनकर उसे असहाय करने के लिए तैयार हैं। देवी जानती थी कलयुग में उनकीशक्तियां कम हो गई है और पाप की शक्तियाँ काफी बढ़ गई हैं, ऐसे में वह मंदिर से बाहर जाकर आपकी शक्तियों का सामना नहीं करना चाहती थी।
पूजारन का मुहूर्त पर आने से इंकार सुनकर सरिता की आंखें भर गई और उसने पूजरन से कहा " यदि आप नहीं आएंगी तो मैं और मेरे पति उस जमीन का मुहूर्त नहीं करेंगे और इस मंदिर में आना भी छोड़ देंगे।" अपने भक्त सरिता की आंखों में आंसू देख कर देवी माता का दिल पसीज गया और पुजारा ने पूजा में आने को हां कह दिया। लेकिन देवी माता को यह जरा भी अहसास नहीं था की यह उसके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी और वह शक्तिशाली अघोरी भैरव काले पत्थर के साथ उस सुन्दर देवी पर कहर ढाएगा।
अगले दिन सुबह पूजारन नारंगी कपड़ों में राव और सरिता के साथ गांव से काफी दूर आ जाती हैं। क्योंकि पूजारन के रूप में देवी के पास उनका त्रिशूल नहीं होता इस वजह से सुंदर देवी यह पता नहीं चला की राव उसे किस मुसीबत में डालने वाला था। पूजा स्थान पर पहुंच कर पूजारन एक बड़े पत्थर के ऊपर बैठ जाती है और सरिता हवन की तयारी करने लगती है।
तभी अचानक भैरव वहां आ जाता है और देवी उसे देख कर आतंकित हो जाती है। देवी समझ नही पाती की यह अघोरी यहां कैसे पहुंच गया क्योंकि वह सरिता और राव पर पूरा भरोसा करती थी। देवी वहां से भाग जाना चाहती थी लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था की वह राव और सरिता को कैसे समझाएगी। देवी अपनी असलियत किसी इंसान को नहीं बता सकती थी और न ही अपना असली रूप किसी मनुष्य को दिखा सकती थी।
भैरव ज़ोर से हंसते हुए पुजारन से कहता है " क्या हुआ पूजारन जी आप इतनी घबराई हुई क्यों लग रही है? सब ठीक तो है ना? आपका पसीना देख कर लग रहा है कि आपको बहुत गर्मी लग रही है?" पूजारन सच में बहुत ज्यादा घबराई हुई थी एक तरह से वह फस गई थी, क्योंकि बिना अपने शक्तिशाली त्रिशूल के वह भैरव का सामना नहीं कर सकती थी और अपने भक्तों के सामने वह अपने असल रूप में भी नहीं आ सकती थी। पूजारण राव से पुछती हैं " राव क्या तुमने ही ना यहां बुलाया है? तुम जानते भी हो की यह पापी अघोरी हैं जो पापा की भावना फैलाने का काम करते हैं"। राव भैरव की और मुस्कुराते हुए बोलता है" पुजारन जी यह मेरे बचपन के मित्र हैं और मैंने इन्हें पूजा पर आमंत्रित किया है!"
देवी बहुत शक्तिशाली और घमंडी थी, उसे अपनी शक्तियों पर भरोसा था, पर उसे दर था की कही बहुत सारे अघोरी इस पर एक साथ हमला न कर दें। भैरव धैर्य से देवी द्वारा हवन में बैठने का इंतजार कर रहा था, उसे पता था कि यदि एक बार देवी ने हवन शुरू कर दिया तो वह हवन खतम होने से पहले हवन के नियमों के अनुसार वहा से उठ नही पाएगी।
देवी पुजारा के रूप में चोखडी मार कर धरती पर बैठ जाती है और जैसे ही वह हवन करने की क्रिया शुरू करती है दो दुष्ट अघोरी खड़ा हो जाता है और वह पाप का काला पत्थर अपने बैग से निकल कर देवी कि गोद में फैंक देता है। जैसे ही वह काला पत्थर पूजारन के ऊपर गिरता है देवी मारे पीड़ा के कराह उठती है " आहहहहह आएएएएए ! ये नही हो सकता ओहहहहह, अब मैं क्या करूं, हायययय सरिता मेरी रक्षा करो।" भैरव और राव जोर जोर से हंसने लगते हैं और भैरव बोलता है "क्या हुआ देवी? बहुत पीड़ा हो रही है क्या? मैं जानता हूं यह काला पत्थर तुम्हारी शक्तियों को खत्म कर देगा और तुम्हें असहनीय पीड़ा देगा, अगर तुम चाहती हो की यह काला पत्थर तुमसे दूर कर दिया जाए तो इसी समय अपने असली रूप को हमारे सामने प्रकट करो, अन्यथा ऐसे ही दर्द में तड़पती रहो। "
देवी को हद से ज्यादा दर्द हो रहा था, उसे पता था कि वह इन पापियों के जाल में फंस गई है और उसे यह भी पता था की अपने त्रिशूल के बिना वह ऐसे ही असहाय रहेगी और दर्द से तड़पती रहेगी। सुंदर देवी के पास कोई चारा नहीं था और वह पूजरण के अपने रूप से देवी के रूप में प्रकट हो जाती है, किंतु उसका शक्तिशाली त्रिशूल भी उस काले पत्थर की काली शक्तियों के सामने टिक नहीं पाता! अपने असली स्वरूप में देवी अत्यंत कमुख और मोहक लग रही थी, उसकी पीड़ा उसकी कामुख्ता को और बढ़ा रहा था।
जब देवी को पता चलता है कि अपनी सारी शक्तियों के साथ भी वह इस काले पत्थर का सामना नहीं कर सकती तो उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं, सुंदर देवी को पता चल जाता है कि वह अब पूरी तरह से हार चुकी है। " सरिता मेरी मदद करो , ये काला पत्थर मुझसे दूर फेंक दो जब तक यह काला पत्थर मेरे निकट रहेगा मैं शक्तिहीन रहूंगी और ऐसे ही दर्द में तड़पती रहूंगी..... आआआआह्ह, राव मैं तुम्हें एक अच्छा इंसान समझती थी पर तुमने मेरे साथ विश्वासघात किया इस अघोरी के साथ मिलकर तुमने मेरी शक्तियां मुझसे छीन ली, मैं तेरा और इस भैरव का सर्वनाश कर दूंगी।"
भैरव देवी के पीछे जा कर खड़ा हो जाता है और देवी के बालों को पकड़ कर उसे ज़ोर से ऊपर खींच कर देवी को अपने पैरों पर खड़ा करता है " तू मेरा सर्वनाश करेगी, पहले अपनी रक्षा तो कर ले देवी।" ऐसा बोल कर भैरव वो काला पत्थर जमीन से उठा कर देवी के पेट पर दबाता है।
जैसे ही वह काला पत्थर देवी की नाजुक त्वचा को छूता है देवी को बहुत ज्यादा दर्द होता है, उसे लगता है जैसे किसी ने जलती हुई लकड़ी उसके पेट पर लगा दी हो " आआहहहह, नहीं मैं मर जाऊंगी, मुझे जाने दे पापी, और पीड़ा नहीं सह सकती, आआह्हह्ह कोई तो मेरी रक्षा करो, ये कला पत्थर तो मेरी जान ही निकाल देगा।"
बीवी को ऐसे असहाय देखकर अघोरी उत्तेजित हो जाता है और देवि का असहाय सुंदर सुडौल शरीर उसे कामवासना के चरम पर ले जाता है, " देवी मैं तेरे दर्द का अंत कर दूंगा यदि तू मेरी एक बात मान लो, मैं चाहता हूं कि तुम मेरे और गांव के समक्ष निर्वस्त्र होकर लेट जाओ।"
देवी को असहनीय दर्द हो रहा था परंतु भैरव की ऐसी गंदी बात सुनकर उसे अत्यधिक क्रोध हुआ और उसने भैरव के ऊपर थूक दिया " दुष्ट पापी चाहे तुम कुछ भी कर लो पर कभी मेरे शरीर को हासिल नहीं कर पाओगे, तुमने चाहे मेरी शक्तियां छीन ली हो पर मैं अपना शरीर तुम्हारे हवाले नहीं करूंगी चाहे तुम मेरी जान ले लो।" दीदी अंदर से बहुत घबराई हुई थी उसे पता था कि उसकी गांड अब चूदने वाली थी। उसने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था की दो साधारण मनुष्य मिलकर उसकी ऐसी स्थिति कर देंगे।
"मैं जानता था देवी ककी तु अपना शरीर मुझे नहीं देगी, परंतु क्या तुमने कभी सोचा है कि यह काला पत्थर तुम्हारे दूधिया स्तनों को कितनी तकलीफ ददेगा यदि मैं इस काले पत्थर को तुम्हारे स्तनों के बीच में डाल दूं!" यह बात सुनकर देवी के होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसकी सांसे रुक गई " नहीं नहीं! तुम ऐसा मेरे साथ नहीं कर सकते, अनर्थ हो जाएगा मेरे स्तनों की त्वचा बहुत नाजुक है और मैं इतनी पीड़ा बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी मुझ पर दया करो भैरव।"
देवी की बात पूरी भी नहीं हुई थी की, भैरव ने वह काला पत्थर देवी के दोनों वक्षों के बीच में फंसा दिया वह पत्थर देवी के ब्लाउज में उसके दोनों स्तनों के बीच में अटक गया। जैसे ही देवी को एहसास हुआ कि वह काला पत्थर उसके स्तनों के बीच में है उसकी छाती जल उठी उसे असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा, देवी एक गाय की भांति की चीखने चिल्लाने लगी जिसकी पूछ काट दी गई हो। " भैरव! यह तूने क्या कर दिया, बहुत अधिक पीड़ा हो रही है। आआह्हह अब मैं क्या करूं यह दर्द तो मेरी जान ही ले लेगा । मुझ पर तरस खाओ भैरव यह पत्थर मेरे स्तनों से हटाओ l, ओहो राव तुम कुछ करो यह पापी भैरव मुझे प्रताड़ित कर कर रहा है।"
देवी अपनी गांड पर गिर जाती है और अपने त्रिशूल की तरफ जो जमीन पर पड़ा हुआ था पहुंचने की कोशिश करती है, देवी को लगता है यदि उसका त्रिशूल उसके हाथ में होगा तो शायद उसकी पीड़ा थोड़ी कम हो जाएगी लेकिन इससे पहले की देवी अपने त्रिशूल को हाथ लगा पाती भैरव उसके त्रिशूल को उठाकर उसके दो टुकड़े करके फेंक देता है। अपनी आंखों के सामने अपनी शक्तियों का सर्वनाश होते हुए देखकर देवी रो पड़ती है "दुष्ट तुमने तो मेरा सर्वनाश कर दिया, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था मैं तो चुपचाप अपने मंदिर में रह रही थी अब मैं क्या करूंगी? अब तुमने मेरी शक्तियां खत्म कर ही दी है अब तो मुझे इस दर्द से मुक्त कर दो मैं कभी तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंगी बस मुझे यहां से जाने दो।" देवी अपने हाथ अपने स्तनों के बीच में डालकर उस पत्थर को निकालने की कोशिश करती है, परंतु जैसे ही उसके हाथों को वह पत्थर स्पर्श करता है देवी के हाथों में भी जलन होती है और देवी उस पत्थर को पकड़ नहीं पाती। " राव मेरी मदद करो आआह्हहहह।"
राव जोर से हंसते हुए बोलता है भैरव "क्यों ना हम इस देवी की साड़ी उतार कर इसके जननांगों को प्रकट करें। यह देवी अपने स्तनों को छुपा कर रखना चाहती है तो क्यों ना हम इसके नीचे के अंगों का आनंद ले लें"
ऐसा बोल कर राव देवी की साड़ी पकड़कर खींचने लगता है जैसे ही वह देवी की साड़ी को पकड़ता है हमारी सुंदर देवी क्यों किसी समय अत्यंत शक्तिशाली थी उस देवी की धड़कन रुक जाती है और वह फटी आंखों से भैरव गौरव की तरफ देखती है उसे समझ में नहीं आ रहा होता कि वह क्या करें। " तुम सही कह रहे हो राव" ऐसा बोलकर भैरव भी देवी की साड़ी का एक किनारा पकड़ लेता है और उसे खींचने में लगता है।
बेबी घबरा जाती है उसके मुंह पर दहशत देखी जा सकती है, वह घबराहट में यह भूल जाती है कि यदि वह अपने स्तनों को निर्वस्त्र भी करेगी तो भी भैरव और राहों उसकी चूत को चोद के ही रहेंगे, डर के मारे देवी अपना ब्लाउज खोल देती है और अपने सुडोल वक्षों को पहली बार किसी मनुष्य के सामने नग्न कर देती है। " पापियों, तुमने मुझे विवश कर दिया है, मैं तुम्हें श्राप देती हूं कि 1 दिन तुम्हारा सर्वनाश हो जाएगा।" ऐसा बोलकर देवी अपने स्तनों को अपने हाथों से ढकने का प्रयास करती है।
ब्रह्मांड की सबसे सुंदर देवी को ऐसी असहाय और नग्न स्थिति में देखकर भैरव और राव का लिंग उत्तेजीत हो जाता है। देवी आधी नंगी हो चुकी थी पर उसका मुकुट अभी तक उसके सिर पर ही था। राव देवी का मुकुट पकड़कर खींचने लगता है तभी भैरव उसको रोकते हुए बोलता है रुक जाओ राव इसका मुकुट इसके सर पर ही रहने दो जब हम किस देवी को चोदेंगे तब हमें एहसास भी तो होना चाहिए कि हम एक देवी को चोद रहे हैं।"
"देवी यदि तू अपने जननांगों को इस काले पत्थर की पीड़ा से बचाना चाहती है तो अपनी साड़ी उतार कर हमें पकड़ा दे अगर मैंने यह साड़ी उतारी तो ये काला पत्थर तेरी गांड मैं घुसा दूंगा" भैरव देवी को भारी आवाज में धमकी देता है, देवी डर के मारे अपनी सारी उतार के नग्न अवाथा में उन दोनो पापियों के सामने खड़ी हो जाती है। देवि का एक हाथ उसके स्तनों को ढकने का प्रयास करता है और दूसरा हाथ उसकी चूत को।
देखते हिंदेखते भैरव और राव भी अपने वस्त्र उतार देते हैं और देवी के करीब पहुंच जाते हैं। राव को देवी की तडपन से काफी आनंद आया था, वो काले पत्थर को देवी की चूत पर स्पर्श करता है जिससे देवी दर्द के मारे चींख मारकर गिर जाती है। उसके बाद दोनो दुष्ट सुंदर देवी के शरीर को जकड़ लेते हैं और भैरव देवी को चूत को चोदता है और राव देवी की गांड को। जब दोनो परमानंद पा लेते हैं उसके बाद वे देवी की चूत में वो काला पत्थर डाल कर वहा से भाग जाते हैं।
नंगी देवी जो अब तक शक्तिहीन हो चुकी थी वहा पड़े पड़े दर्द में तड़पती रहती है और थोड़ी देर बाद चिंख मार कर मर जाती है।
